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Showing posts from July, 2011
Innocent Self
आज एक नयी दिशा ले कर आसमान को छूने की जिद की है .... भटकता था आज तक इस्सी ख्याल में कुत्च इफ्तिखार की परश्तिश की है ..."
"जूनून रुका हुवा और गुरुर बिखरा हुआ तेरे पास होने पर एक नयी पहेचन की ख्वाइश की है ..."
Meanderings Self
"कही जगहों से निकलती है यह सुमसाम गलिया कही दिशाओ में मिलती है यह सुमसाम गलिया कही मोड़ पर गुमनाम हो जाती है यह गलिया कही मुकाम पर आबाद हो जाती है यह गलिया फिर भी एक मुसाफिर की इक्तिज़ा करती है यह गलिया इस ही ख्याल में, कही नाज़िश न खो जाये "
Conquer of Paradise
सितारों से सजाया है उमीद का दामन रातो को सजाई है कही सुरजो का अमन ख्वाइश से भर आई है अखियो में सावन सर तबी जिंदादिली पर एतबार हुआ है हमें जब से मिला है हम-साज़ इह्तियाज..